मिर्जापुर गांव में हैंडपंप लगाने में धांधली उजागर करने को सूचना के अधिकार के तहत जानकारी जुटाना वहां के एक ग्रामीण व मानवाधिकार कार्यकर्ता को भारी पड़ रहा है। काफी भागदौड़ के बाद आधी-अधूरी जानकारी मिली तो असत्य सूचना की दूसरी अपील आयुक्त से की गई। अब विभाग के जनसंपर्क अधिकारी का पत्र पहुंचने पर ग्रामीण सकते में हैं। जनसंपर्क अधिकारी ने खुद के सामने जांच कराने हेतु समस्त कर्मचारियों को कार्यालय में उपस्थित कर संपूर्ण अभिलेख इकट्ठा कराने के लिए 1.16 लाख रुपये का ड्राफ्ट जमा कराने को कहा है।
ग्रामीण प्रदीप कौशिक का आरोप है कि मिर्जापुर में 58 हैंडपंप में धांधली बरती गई है। इनमें कई नियम विरुद्ध तरीके से चारदीवारी के अंदर हैं। इन्हें लगाने में दूरी का मानक भी नहीं अपनाया गया है। इस संबंध में 2 अगस्त 2010 को आरटीआई के तहत सूचना जल निगम कार्यालय से मांगी गई। इस आरटीआई पर सूचना न मिलने पर पहली अपील 28 सितंबर को डाली गई। इसके बाद जो सूचना पहुंची उसमें उन्होंने सवाल उठाया कि हैंडपंप चारदीवारी (घर) के अंदर नहीं लगाया जा सकता, लेकिन गांव में 60 फीसदी हैंडपंप घर के अंदर लगे हैं। हैंडपंप लगाए जाने का वर्ष दर्शाया नहीं गया। कुछ हैंडपंप ऐसे दर्शाए गए हैं, जिनके नाम सूची में हैं, लेकिन मौके पर कोई हैंडपंप नहीं लगा हुआ है। जानकारियों को असत्य व अधूरा बताते हुए उन्होंने जांच कर सही जानकारी की दूसरी अपील 26 नवंबर 10 को आयुक्त राज्य सूचना आयोग से की। इस अपील के बाद कार्यालय अधिशासी अभियंता निर्माण खंड सेक्टर 27 के जनसंपर्क अधिकारी एसके जैन ने पत्रांक 3149/डब्ल्यू-30/53 दिनांक 16 दिसंबर में बताया कि ग्रामीणों द्वारा अपने सामने खुले स्थान, चबूतरे पर हैंडपंप लगवाया जाता है। इसे बाद में दीवार आदि के अंदर कर लिया जाता है, जो कि नियमानुसार गलत है। कुछ अन्य बिंदुओं के जवाब में कहा गया कि इनकी जानकारियों के लिए कार्यालय के स्थानांतरित कर्मचारियों व अधिकारियों को बुलवाकर उनके रिकॉर्ड के अनुसार स्पष्टीकरण देने में करीब छह माह और रुपये 1.16 लाख रुपये व्यय होंगे। यदि आप उक्त जांच अपने सामने कराना चाहते हैं तो यह धनराशि जमा कराने के बाद ही स्पष्टीकरण दिया जा सकेगा।
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