Saturday, January 15, 2011

योजना आयोग के एतराज पर भड़का गृह मंत्रालय

नक्सल प्रभावित इलाके में तुरंत विकास के लिए सीधे उस जिले को 25 करोड़ रुपये देने की गृह मंत्रालय की योजना में कोई बदलाव नहीं होगा। इस योजना के तहत सरकारी अधिकारियों को ही खर्च का अधिकार दिए जाने पर योजना आयोग के एक सदस्य ने गंभीर एतराज जताया है, लेकिन गृह मंत्रालय का कहना है कि इसके सभी पहलुओं पर पहले ही विचार कर लिया गया है। गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक नक्सल प्रभावित क्षेत्र के विकास के लिए बनाई गई एकीकृत कार्य योजना (आइएपी) के सभी पहलुओं पर विचार के बाद इसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी है। इसलिए जिन लोगों को इस पर एतराज है, उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। साथ ही योजना आयोग के सदस्य की ओर से सीधे प्रधानमंत्री को पत्र लिखे जाने पर भी ये एतराज जताते हैं। ये कहते हैं कि ऐसे किसी सदस्य को अपने संस्थान के प्रमुख को पत्र लिखना चाहिए था, न कि प्रधानमंत्री को। ये बताते हैं कि इस योजना के तहत सभी संबंधित राज्यों को रकम जारी भी कर दी गई है। योजना आयोग की ओर से दिए गए सभी सुझावों के गुण-दोष पर विस्तार से पहले ही चर्चा की जा चुकी है। इसके बाद ही कैबिनेट ने तय किया है कि इस धन के खर्च की जांच करने के लिए एक समिति होगी, जिसमें जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और जिला वन अधिकारी शामिल होंगे। जबकि योजना आयोग के सदस्य मिहिर शाह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर कहा है कि यह अधिकार पंचायती राज संस्थाओं और स्थानीय लोगों को दिया जाना चाहिए। इस योजना के तहत सभी ऐसे जिलों में इस साल मार्च से पहले 25 करोड़ की लागत से तुरंत पूरा किए जा सकने वाले काम करने हैं। पिछले साल दिसंबर में ही यह योजना शुरू की गई है।

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