Wednesday, June 29, 2011

टाटा की दलील, बिना बताए भूमि अधिग्रहण सही नहीं


हुगली की जिलाधिकारी श्रीप्रिया रंगराजन ने शुक्रवार को सिंगुर में टाटा मोटर्स से संबंधित डेढ़ पन्ने की रिपोर्ट कलकत्ता हाई कोर्ट को सौंप दी। इसमें टाटा मोटर्स के नैनो प्लांट में किसी भी तरह की चोरी से साफ इंकार किया है। टाटा मोटर्स ने बीते बुधवार को सिंगुर भूमि अधिग्रहण विधेयक के विरोध में अदालत में एक याचिका दायर की है। याचिका में विधेयक को असंवैधानिक करार देने के साथ प्लांट से कीमती सामान चोरी होने का आरोप लगाया है। इस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने गुरुवार को चोरी के संबंध में जिला प्रशासन से शुक्रवार को रिपोर्ट तलब की थी। मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी। याचिका की सुनवाई कलकत्ता हाई कोर्ट के न्यायाधीश सौमित्र पाल की अदालत में शुक्रवार को तीसरे दिन भी जारी रही। हुगली की जिलाधिकारी श्रीप्रिया रंगराजन ने शुक्रवार को अदालत को डेढ़ पन्ने की रिपोर्ट सौंप दी। इसमें उन्होंने बताया है कि टाटा की जमीन को लेकर विवाद के बाद वहां एक अधिशासी अधिकारी नियुक्त किया गया था। 21 जून को नोटिस जारी करने के दिन वहां कोई घटना नहीं घटी। 22 23 जून को कुछ लोग बांस व टीन के टुकड़े ले जा रहे थे, जिन्हें गांव के लोग पकड़कर सिंगुर थाना ले गए और सारा सामान वापस ले लिया गया। कानून व्यवस्था में खामी को लेकर अभी तक उनके पास कोई शिकायत नहीं आई है। रिपोर्ट में जिलाधिकारी ने कहा है कि उन्होंने खुद परियोजना इलाके में प्रवेश कर वहां स्थित सभी सामानों की सूची तैयार की थी। सूची में दर्ज सभी सामान प्लांट में यथावत है। सूची उनके पास है। रिपोर्ट में नैनो प्लांट में चोरी की किसी भी घटना से साफ इंकार किया गया है। वहीं टाटा पक्ष के अधिवक्ता समरादित्य पाल ने कहा कि जमीन अधिग्रहण कानून के मुताबिक टाटा की जमीन को पब्लिक पर्पस व आक्शन के लिए देना होगा। जमीन अधिग्रहण मामले में केंद्रीय व राज्य सरकार के कानूनों में केंद्र का मान्य होता है, लेकिन इस मामले में राज्य सरकार के कानून को ही प्रधानता दी गई है। बार बार अनिच्छुक किसानों की जमीन वापस करने की बात कही जा रही है, जबकि संविधान में अनिच्छुक किसान जैसा कोई शब्द ही नहीं है। सिंगुर भूमि अधिग्रहण विधेयक पास होने के साथ ही अचानक कब्जे की नोटिस नहीं लगाई जा सकती है। संविधान के धारा 24 में इस बात का जिक्र नहीं है। जो बिल पास हुआ है, उसकी जानकारी कोर्ट को नहीं दी गई है। जिसकी जमीन है, उसे बिना बताए अधिग्रहण का नोटिस लगा दिया गया, जो सही नहीं है। इसके जवाब में राज्य के महाधिवक्ता अनिंद्य मित्रा ने कहा कि टाटा मोटर्स ने ड्ब्ल्यूबीआईडीसी (वेस्ट बेंगाल इंडस्टि्रयल डेवलपमेंट कारपोरेशन) को बिना बताए जमीन को 99 वर्ष के लीज पर ले लिया। इस लीज में वेंडरों को जमीन देने की बात नहीं कही गई है। वेंडरों को जमीन सरकार से नहीं बल्कि टाटा से मिलनी थी। अब विधानसभा में बिल पास होने के बाद यह जमीन टाटा मोटर्स की नहीं रही। टाटा ने यह जमीन नैनो गाड़ी बनाने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि उसके लिए पुर्जे इकट्ठा करने के लिए ली थी। जमीन का मालिकाना हक पाने के 32 महीने तक उस जमीन का कंपनी ने कोई इस्तेमाल नहीं किया। उन्होंने कहा कि जमीन अधिग्रहण कानून, 1894 के धारा 24 के मुताबिक टाटा मोटर्स जमीन की मालिक नहीं- अत: उसे मुआवजा देने का प्रश्न ही नहीं उठता। कोर्ट में सिंगुर अधिग्रहण संबंधी जो मामला चल रहा है, उसके एक अन्य आवेदक केदारनाथ यादव को भी इस मामले में हिस्सा लेने के लिए हाई कोर्ट ने अनुमति प्रदान कर दी है।


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