Tuesday, June 14, 2011

दर्जनभर कानूनों में होंगे व्यापक संशोधन

एक तरफ जहां वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की अगुवाई में सरकार बाबा रामदेव को काले धन के मुद्दे पर अनशन नहीं करने के लिए मनाने में जुटी रही वहीं दूसरी तरफ वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी बुधवार को इस उधेड़बुन में लगे रहे कि काले धन के खिलाफ कानूनी शिकंजा किस तरह से और सख्त किया जाए। चार दिन पहले गठित वित्त मंत्रालय की उच्चस्तरीय समिति ने अनौपचारिक तौर पर काम शुरू कर दिया है। समिति की तरफ से कम से कम दर्जन भर मौजूदा कानूनों में व्यापक बदलाव करने की संभावना जताई जा रही है। मंगलवार को सेवानिवृत्त हुए सीबीडीटी अध्यक्ष सुधीर चंद्रा इस समिति के अध्यक्ष बने रहेंगे। पिछले शनिवार को जब समिति के गठन का फैसला किया गया था तब यह तय हुआ था कि सीबीडीटी अध्यक्ष इसके अध्यक्ष होंगे, लेकिन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी का मानना है कि काले धन पर गठित समिति की अध्यक्षता सुधीर चंद्रा करेंगे तो वह जल्दी अपने सुझाव दे सकती है। इस बारे में जल्दी ही अलग से अधिसूचना जारी होगी। वित्त मंत्री स्वयं इस समिति की प्रगति की निगरानी करना चाहते हैं ताकि काले धन पर शिकंजा कसने के लिए कानूनी संशोधनों की तैयारी छह महीने में पूरी की जा सके। वित्त मंत्रालय के उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक सरकार यह मानती है कि मौजूदा कानूनी ढांचे में बदलाव के जरिए ही काले धन पर रोक लगाई जा सकती है। समिति की नजर काले धन से संबंधित लगभग दर्जन भर कानूनों पर हैं। इसमें प्रत्यक्ष कर व अप्रत्यक्ष कर से संबंधित कानूनों के अलावा प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉंड्रिंग एक्ट, गैर-कानूनी तरीके से विदेशी मुद्रा रखने से संबंधित कानून (कोफेपोसा), कंपनी अधिनियम, उपहार कर अधिनियम, स्टांप शुल्क अधिनियम, सिक्योरिटीज कांट्रैक्ट एक्ट, डिपॉजिटरीज अधिनियम में मुख्य तौर पर कई तरह के संशोधन करने पड़ सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक कई अन्य ऐसे कानून भी हैं जिनमें थोड़े बहुत बदलाव की जरूरत पड़ेगी मसलन बैंकिंग कंपनीज, फाइनेंशियल इंस्टीट्यूट व इंटरमीडियरीज रुल्स, 2005 में कुछ बदलाव करने पड़ेंगे ताकि बैंकों व अन्य वित्तीय संस्थानों में निवेश करने वालों के नाम आसानी से जांच एजेंसियों को मिल सके। इसी तरह से सरकार का अनुभव बताता है कि काले धन को छिपाने में ट्रस्ट एक्ट और साझेदारी एक्ट के कुछ प्रावधानों को भी हथियार बनाया जाता है इसलिए इनमें भी संशोधन किए जाने की संभावना है। कंपनियों के हिसाब किताब की जांच पड़ताल करने से संबंधित कानून (आइसीएआइ एक्ट), कंपनी सेक्रेटरीज एक्ट जैसे कुछ अन्य कानूनों में संशोधन पर भी विचार किया जाएगा। काले धन का मुद्दा पिछले कुछ समय से काफी गरमा गया है। पिछले पांच दिनों के भीतर वित्त मंत्रालय ने काले धन पर तीन महत्वपूर्ण समितियों के गठन का एलान किया है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण सीबीडीटी अध्यक्ष वाली समिति को माना जा रहा है।

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