Friday, June 10, 2011

गेहूं को सड़ने से बचाने में जुटी सरकार


उत्तर भारत में मानसून के आने से पहले ही सरकार खुले में पड़े गेहूं को छतों के नीचे पहुंचाने में जुट गई है। इसके लिए खाद्य मंत्रालय ने रेलवे से सहयोग मांगा है। खाद्य मंत्री केवी थॉमस ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने पंजाब और हरियाणा समेत अन्य राज्यों की मंडियों में खुले में पडे़ गेहूं की ढुलाई की एक विस्तृत योजना भी तैयार की है, जिसमें खाद्य मंत्रालय राज्य सरकारों और रेलवे को शामिल किया गया है। खाद्यान्न प्रबंधन की यह दीर्घावधि योजना खाद्य सुरक्षा विधेयक को ध्यान रखकर तैयार की गई है। प्रस्तावित योजना का मसौदा प्रधानमंत्री को भेज दिया गया है। इसमे रेलवे, एफसीआइ और राज्य सरकारों के उच्चाधिकारियों की भूमिका अहम बताया गया है। खाद्यान्न प्रबंधन में रेलवे की भूमिका सबसे अहम होगी, जो खरीद सीजन में पर्याप्त रैक उपलब्ध कराने का इंतजाम करेगी। प्रस्तावित योजना में रेल और खाद्य मंत्रालय समेत राज्य सरकारों के बीच एक समन्वय स्थापित करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की जाएगी। यह समिति राष्ट्रीय स्तर पर अनाज के भंडारण के साथ उसकी ढुलाई सुनिश्चित करेगी। यही समिति खाद्यान्न उत्पादक राज्यों से खरीद के समय ही उपभोक्ता राज्यों तक अनाज पहुंचाने की व्यवस्था पर नजर रखेगी। राष्ट्रीय स्तर की इस समिति में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन, खाद्य सचिव और भारतीय खाद्य निगम (एफसीआइ) के अध्यक्ष शामिल किए जाने का प्रस्ताव है। इसी तर्ज पर राज्य स्तरीय समिति भी गठित की जाएगी। इसमें राज्यों के मुख्य सचिव, राज्यों के खाद्य सचिव और एफसीआइ के कार्यकारी निदेशक और रेलवे के क्षेत्रीय प्रबंधकों को शामिल किया जाएगा। राष्ट्रीय समिति जहां पूर्वोत्तर के राज्यों तक अनाज पहुंचाने व भंडारण की व्यवस्था देखेगी, वहीं राज्य स्तरीय समिति जिला मुख्यालयों तक अनाज भंडारण करने में सहयोग करेगी।

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