Saturday, February 5, 2011

यूपी में सूचना पाना आसान नहीं


सूचना का अधिकार कानून भले ही लागू हो गया हो लेकिन उत्तर प्रदेश में सूचना पाना आसान नहीं। शायद यही वजह है कि विभागों से निराश लोग राज्य सूचना आयोग पर दस्तक दे रहे हैं और आयोग में लंबित वादों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। पिछले साल ही साढ़े पांच हजार नए वाद राज्य सूचना आयोग पहुंचे। आज की तारीख में सूचना आयोग में लंबित वादों की संख्या 28 हजार का आंकड़ा पार कर गई है जो यह बताने को काफी है कि सरकार विभाग सूचना के अधिकार कानून के कितने पाबंद हैं? सबसे ज्यादा मामले राजधानी के : यह हैरान कर देने वाली जानकारी है कि सूचना देने में कतराने के सबसे ज्यादा मामले कहीं और के नहीं बल्कि राजधानी लखनऊ के हैं। सूचना आयोग में लंबित कुल 28,743 वादों में सर्वाधिक 4794 वाद लखनऊ से हैं। इलाहाबाद जिले में भी लोगों को सूचनाएं इतनी आसानी से नहीं मिल रही हैं। पिछले साल जो साढ़े पांच हजार मामले आयोग में दर्ज हुए, उनमें से यहां 963 मामले इलाहाबाद के ही थे। आयोग में अब तक इलाहाबाद के 2132 मामले दर्ज हो चुके हैं। इनके अलावा सुल्तानपुर के 1309,वाराणसी के 1064, कानपुर नगर के 943, मुरादाबाद के 890, आगरा के 818, गोरखपुर के 733, बरेली के 623 और हरदोई के 622 वाद राज्य सूचना आयोग में दर्ज हैं। सूचना न देने वालों में सरकार का राजस्व विभाग सबसे फिसड्डी है। यहां से जवाब न आने के कारण हजारों मामले लंबित पड़े हैं। गृह, ग्राम्य विकास, बेसिक व माध्यमिक और चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग भी जवाब देने में नौ दिन में ढाई कोस की रफ्तार से ही चल रहे हैं। मुख्य सूचना आयुक्त आरएस पंकज कहते है कि सूचनाएं न मिलने पर लंबित मामले जिलेवार सूचीबद्ध कर संबधित जिलाधिकारियों को हर माह के पहले सप्ताह में भेजे जा रहे हैं.

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