फिल्म, टीवी सीरियल व अन्य कार्यक्रमों व कृतियों की कथा-पटकथा और गीत लिखने वाले लेखकों तथा उन्हें सुरों से सजाने वाले संगीतकारों का हक अब कोई नहीं मार सकेगा। संसद ने कानून बनाकर इनकी आजीवन आर्थिक सुरक्षा का इंतजाम कर दिया है। अब कांट्रैक्ट के बाद इन कृतियों के प्रसारण या नकल की स्थिति में प्रसारकों को कलाकारों को हर बार रायल्टी देनी पड़ेगी। लोकसभा ने मंगलवार को कापीराइट एक्ट (संशोधन) विधेयक 2012 को मंजूरी दे दी, जिसे राज्यसभा 17 मई को ही पारित कर चुका है। लोस में सभी दलों ने सरकार के इस कदम को कलाकारों के हक में उठाया गया सराहनीय कदम बताया। मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने लोस में विधेयक प्रस्तुत करते हुए कहा, निर्माताओं के रवैये की वजह से अनेक गरीब कलाकारों को जीवन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। नया कानून वृद्ध कलाकारों को मान- सम्मान से जीवन यापन में समर्थ बनाएगा। उन्होंने कहा, मशहूर शहनाई वादक भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्ला खां तथा सितार सिद्ध पंडित रविशंकर जैसे असाधारण कलाकारों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्हें मकान का किराया देने तक के लाले पड़ गए। विधेयक टीवी और रेडियो प्रसारकों को बाध्य करता है कि वे जितनी बार भी किसी कलाकार की कोई रचना प्रसारित करेंगे उतनी बार उसे रायल्टी देंगे। एक्ट में लेखकों की उनकी कृतियों पर अधिकार जताने के विशेष प्रावधान हैं। गीतकार म्यूजिक कंपनियों के साथ रायल्टी पर सौदेबाजी कर सकेंगे। विधेयक किसी भी साहित्य, नाटक या संगीत संबंधी कृति की मूल रिकॉर्डिग के बाद पांच साल तक उसका कवर वर्जन लाने पर पाबंदी लगाता है। छात्रों को शोध कार्यो के लिए कॉपीराइट एक्ट से छूट है पर पायरेसी करने वालों के लिए जुर्माने के साथ ही दो वर्ष जेल का प्रावधान है। सिब्बल ने कहा, वह चाहते थे कि फिल्म के प्रमुख निर्देशक को निर्माता के साथ लेखक की मान्यता मिले, लेकिन संसद की स्थायी समिति ने राय दी है कि अभी प्रमुख निर्देशक को रायल्टी में हिस्सेदार बनाने का वक्त नहीं आया है। सरकार के कदम का स्वागत करते हुए सदन में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने कहा, पं. रविशंकर से लेकर एआर रहमान तक ने कापीराइट एक्ट में संशोधन की मांग की थी।
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