Friday, October 21, 2011

उत्तराखंड में लागू रहेगा भूमि सुधार संशोधन कानून


उत्तराखंड में फिलहाल जमींदारी उन्मूलन भूमि सुधार संशोधन कानून लागू रहेगा और भूमिहीनों पर 250 वर्गमीटर से ज्यादा कृषि भूमि खरीदने पर रोक लगी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने संशोधन कानून निरस्त करने के उत्तराखंड हाई कोर्ट के फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने गत 22 सितंबर को बाहरी लोगों के जमीन खरीदने के अधिकार सीमित करने वाला संशोधन कानून निरस्त कर दिया था। उत्तराखंड सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। रोक का आदेश बृहस्पतिवार को न्यायमूर्ति बीएस चौहान व न्यायमूर्ति एके पटनायक की पीठ ने उत्तराखंड सरकार की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई बाद जारी किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका पर प्रतिपक्षी सर्वेश शर्मा को जवाब दाखिल करने के लिए नोटिस भी जारी किया है। इससे पहले राज्य सरकार की ओर से पेश वकील रचना श्रीवास्तव ने पीठ से हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट का यह कहना गलत है कि राज्य सरकार ने एक ही जैसे लोगों के बीच दो श्रेणियां बना दी हैं। या फिर इस कानून से बाहरी लोगों के उत्तराखंड में बसने के अधिकार बाधित होते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने सिर्फ कृषि भूमि की खरीद फरोख्त नियमित करने की कोशिश की है। संशोधन कानून के बाद भी भूमिहीन व्यक्ति सरकार की अनुमति से 250 वर्गमीटर से ज्यादा भूमि खरीद सकता है। राज्य सरकार ने की याचिका में कहा गया है कि जमींदारी उन्मूलन व भूमि सुधार (जेडएएलआर) संशोधन अधिनियम 2003 लाने का उद्देश्य राज्य में कृषि भूमि की अनियमित खरीद-फरोख्त रोकना और छोटे किसानों का हित संरक्षित करना है। इसके अलावा राज्य की सीमाएं अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से लगी हैं। ऐसा इसलिए किया गया ताकि आतंकवादियों और घुसपैठियों द्वारा राज्य में भूमि की खरीद- फरोख्त न हो। इससे राज्य को खतरा हो सकता है। इस कानून का उद्देश्य लोगों के बीच भेदभाव करना या श्रेणी में बांटना नहीं था। उत्तराखंड सरकार ने जेडएएलआर कानून में 12 सितंबर 2003 को संशोधन किया था। संशोधित कानून में कृषि भूमि रखने वाले भूमिदार को साढ़े 12 एकड़ तक कृषि भूमि रखने की इजाजत है। जबकि भूमिहीन व्यक्ति सिर्फ 250 वर्गमीटर कृषि भूमि खरीद सकता है। इससे अधिक जमीन खरीदने पर उसे राज्य सरकार से अनुमति लेनी होगी। कानून में कहा गया है भूमिहीनों के कृषिभूमि खरीदने के अधिकार सीमित करने वाला यह कानून 12 सितंबर 2003 की तिथि से लागू होगा। इस तिथि से पहली हुई खरीद-फरोख्त इस कानून से प्रभावित नहीं होगी। सर्वेश शर्मा ने उत्तराखंड हाई कोर्ट में रिट याचिका दाखिल संशोधित कानून को चुनौती दी। हाई कोर्ट ने गत 22 सितंबर को संशोधित कानून के प्रावधान निरस्त कर दिए। हाई कोर्ट ने उसे लोगों के बीच भेदभाव और श्रेणियां बाटने वाला कानून बताते हुए संविधान के विरुद्ध माना था।